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भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री - इंदिरा गांधी

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इंदिरा गांधी भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री थी जो न केवल अपनी व्यक्तित्व के लिए बल्कि सच्ची देशभक्ति के लिए भी जानी जाती थी। उन्होंने अपनी राजनीति जगत में अलग ही पहचान बनाई। इंदिरा गांधी इंदिरा गांधी का जन्म 19 नवंबर 1917 को उत्तर प्रदेश के परिवार में हुआ था। उनकी माता का नाम कमला नेहरू व पिता का नाम पंडित जवाहरलाल नेहरु था। वह इकलौती संतान थी। उनके दादाजी का नाम मोतीलाल नेहरू था। जवाहरलाल नेहरू और मोतीलाल नेहरू दोनों का संबंध वकालत से था और दोनों ने ही देश को स्वतंत्र करवाने में संपूर्ण सहयोग दिया था। इंदिरा गांधी ने अपनी शिक्षा अलग-अलग स्थानों से प्राप्त की। उन्हें बचपन से ही तरह-तरह की किताबें और पत्रिकाएं पढ़ने का शौक था, लेकिन उनका अंग्रेजी भाषा की तरफ अधिक रुझान था। उन्होंने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में भी दाखिला लिया था। इंदिरा गांधी ने अपनी राजनीतिक जीवन की शुरुआत अपने पिता की देखरेख में की थी। 1959 में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष बनी। जब लाल बहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री बने तब इंदिरा गांधी को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय दिया गया। शास्त्री जी की मृत्यु के बाद इंदिरा ...

ओलंपिक इतिहास में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला एथलीट - कर्णम मल्लेश्वरी

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कर्णम मल्लेश्वरी का जन्म 1 जून 1975 को श्रीकाकुलम आंध्र प्रदेश में हुआ था। कर्णम के पिता का नाम रामदास है, जो आरपीएफ में कॉन्स्टेबल है। मल्लेश्वरी जब केवल 9 साल की थीं, तब वह अपनी बड़ी बहन के साथ जिम जाती थीं। तभी उनकी रुचि खेलों में उत्पन्न हुई। कर्णम मल्लेश्वरी साल 1989 में मैनचेस्टर में विश्व चैंपियनशिप में तथा बीजिंग एशियन खेलों में वह भी 20 सदस्यी टीम के साथ भाग लेने गई थी। मल्लेश्वरी का विवाह हरियाणा के यमुनानगर की राजेश त्यागी के साथ हुआ। कर्णम मल्लेश्वरी ने अपने करियर की शुरुआत जूनियर वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप से की जहां उन्होंने नंबर वन के पायदान पर कब्जा किया। साल 1992 के एशियन चैंपियनशिप में मल्लेश्वरी ने तीन रजत पदक जीते, लेकिन उनको सबसे बड़ी जीत 2000 में सिडनी ओलंपिक में मिली। वहां पर उन्होंने कांस्य पदक पर कब्जा किया और उसी पदक के साथ ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला भी बनी। इतना ही नहीं साल 1994 में कर्णम मल्लेश्वरी को अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया, 1995 में राजीव गांधी खेल रत्न से नवाजा गया और 1999 में पदम श्री पुरस्कार भी हासिल हुआ।

महिला सशक्तिकरण की मिसाल साबित करने वाली - अहिल्याबाई होल्कर

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भारत की रानियां, महारानियां और मल्लिकाएं केवल अपने सौंदर्य और प्रतिभा के लिए ही नहीं जानी जाती बल्कि उनकी शक्ति, सामाजिक कार्य जैसे कारण से भी जानी जाती है। ऐसी ही एक महिला है जिन्होंने महिला सशक्तिकरण की मिसाल साबित की थी जिनका नाम है अहिल्याबाई होल्कर। अहिल्याबाई होल्कर अहिल्याबाई होल्कर मध्यप्रदेश के महेश्वर की कर्ताधर्ता थी और होल्कर साम्राज्य का एक अहम हिस्सा। उन्होंने कई लोगों के आक्रमण से अपने मालवा की रक्षा की और सामाजिक कार्य भी किए। होल्कर ने औरंगजेब द्वारा तोड़े हुए मंदिरों का दोबारा निर्माण करवाया साथ ही पूरे भारत में श्रीनगर, हरिद्वार, केदारनाथ, बदरीनाथ, सोमनाथ, महाबलेश्वर, इंदौर, प्रयाग, वाराणसी, काठमांडू आदि में बहुत से मंदिर बनवाए। अहिल्याबाई के पति की मृत्यु के बाद उनके ससुर ने उन्हें सती होने से रोका और उन्हें सैन्य शिक्षा दी जिसकी वजह से वह महिला सशक्तिकरण की मिसाल मानी जाती है। उन्होंने राजपूत, भील, दीवान, गंगाधर राव और कई विदेशी शासकों के आक्रमण से अपने राज्य को बचाया और उत्तराधिकारी की बागडोर भी संभाली। अहिल्याबाई ने केवल मंदिर ही नहीं बल्कि अनाथ आश्रम, सिंचाई टैं...

फोन फबिंग कर सकता है आपको अपनों से दूर - सुनिधि गर्ग

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अक्सर आपने देखा होगा कि जब हम किसी से बात करते हैं लेकिन उनसे जुड़ाव महसूस नहीं कर पाते क्योंकि जिनसे आप बात कर रहे होते हैं वो तो फोन पर चिपके हुए हैं। आपके माता-पिता आपसे कुछ कह रहें होते हैं, पत्नी कुछ बता रही है, बच्चे कुछ पूछ रहे हैं और दोस्त आपसे बात कर रहे हैं लेकिन आपका ध्यान तो फोन पर है। Phone Phubbing यह सभी लक्षण फोन फबिंग के हैं। फोन फबिंग मतलब फोन के आगे अपनों को नजरंदाज करना । यह बहुत ख़तरनाक साबित हो सकता है। इससे केवल आपके अपने दूर ही नहीं होंगे बल्कि आपको नजरंदाज भी करने लगेंगे और आपको पता भी नहीं चलेगा। ऑस्ट्रेलिया की चार्ल्स स्टुअर्ट यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर यसलीम अल सगफ ने फबिंग पर 170 शोधों पर अध्ययन करने के बाद "साइकोलॉजी ऑफ फबिंग" किताब लिखी।  फबिंग का बच्चों पर सबसे ख़तरनाक असर पड़ता है। वे खुद को कटा हुआ और अकेला महसूस करते हैं। इससे वे डिप्रेशन का भी शिकार हो सकते हैं। इसलिए माता-पिता अपने बच्चों से बात करते समय फोन का इस्तेमाल न करें।  फोन फबिंग से पति-पत्नी में भी लड़ाई-झगड़े बढ़ते हैं। साथी अपने आपको अकेला पाता है। वो आप पर शक करने लगत...

संविधान को निभाना हमारा कर्तव्य

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हमारा संविधान हमारे जीवन का अहम हिस्सा है जिसे निभाना केवल हमारा फ़र्ज़ नहीं बल्कि कर्तव्य भी बनता है। आपने कभी सोचा है कि अगर संविधान नहीं होता तो आज हम कहां और किस हालात में होते? अगर 26 नवंबर 1949 को भारतीय संविधान सभा ने संविधान को अपनाया नहीं होता तो शायद आज हमारा देश जिन ऊंचाइयों को छू रहा है वो हासिल नहीं हो पाता। जिस आराम भरी जिंदगी को हम जी रहे हैं न जाने किस हालात में होते।  Indian Flag हमारा सांस लेना भी संविधान की शक्ति का प्रतीक है। अपने हक़ के लिए डटे रहना और हर कर्तव्य को निभाना ही हमारे संविधान को जीना है। भारतीय संविधान दिवस की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं।

अंतरराष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन दिवस आज

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वैसे तो भारत में पति को परमेश्वर का दर्जा दिया गया है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि वह इस पद के काबिल भी या नहीं? आज भी बहुत से पुरुष अपनी मर्दानगी अपनी पत्नी पर अत्याचार कर के साबित करते हैं। अत्याचार किसी भी तरीके का हो सकता है जैसे भावनात्मक, शारीरिक, यौन हिंसा।  नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार आज भी पंजाब में 11.6% महिलाएं, चंडीगढ़ में 9.7% और हिमाचल में 8.6% महिलाएं पति द्वारा शारीरिक और यौन हिंसा की शिकार होती है। सबसे ज्यादा स्थिति हरियाणा में ख़राब है जहां 17.9% महिलाएं इस अत्याचार का सामना करती है। इस दिन की शुरुआत 25 नवंबर 1960 में हुई थी जब पैट्रिया मर्सिडीज मिराबैल, मारिया अर्जेंटीना मिनेर्वा मिराबैल और एंटोनिया मारिया टेरेसा मिराबैल तीनों बहनों की क्रूरता से हत्या कर दी थी। इसलिए 25 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया।  उस दिन अगर तीनों बहनें लड़ने का साहस न दिखाती तो यह दिवस नहीं मनाया जाता।  इसलिए आप सभी महिलाओं से अनुरोध है कि अगर आप भी किसी अत्याचार का शिकार हो रही है तो आज ही अपनी आवाज़ उठाएं...

एसटीडी ने बदला संपर्क का जरिया - सुनिधि गर्ग

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वैसे तो आज हर किसी के हाथ में ही फ़ोन नज़र आता है। इसलिए इसकी कीमत का एहसास हमें समझ नहीं आता है। जब भी मन किया कभी भी, कहीं भी, किसी को भी फ़ोन मिलाया और बात करली।  STD Phone लेकिन क्या आप जानते हैं एक समय ऐसा भी था जब बात करने के लिए कबूतर के द्वारा चिट्ठी या संदेश भेजे जाते थे। फिर धीरे-धीरे समय बदला और समय के साथ तकनीक। फिर 1960 में आज के ही दिन यानी 25 नवंबर को भारत में एसटीडी की सेवा शुरू हुई। एसटीडी की सेवा यानी एक से दूसरे शहर में फोन करने की सेवा।  सबसे पहला इस सेवा के जरिए फोन किया गया था कानपुर से लखनऊ। यह एक सफल प्रयोग था। इसके बाद इस सुविधा से न जाने कितने ही साल भारतीय जनता ने एसटीडी का प्रयोग किया।